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Chanakya Niti

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CHANAKYA NITI
Chanakya Niti Chapter 1“It is imprudent to advise a fool, care for a woman with bad character and to be in the company of a lethargic and unhappy person” ― Acharya Chanakya
A man shouldn’t live in a place where people are not afraid of the law, are shameless, and there is no clever man, where people lack in kindness, and where exists no creativity or art” ― Acharya Chanakya

ये कहानियाँ आपको सफल बना सकती है 3 Best Motivational Story

ये कहानियाँ आपको सफल बना सकती है |

ये कहानियाँ आपको सफल बना सकती है 3  Best Motivational Story


किसी ने मुझसे पूछा motivational story  पढ़ने से क्या होता है |

मेने जवाब दिया motivational story पढ़ने से  हमे दुसरो की गलतियों का पता चलता है ताकि हम गलती ना करे इसलिए ज्यादा से ज्यादा  motivational story  को पढ़िए |

किस्सा 50 रुपये का

किस्सा 50 रुपये का |
एक समय की बात है एक शख्स पैदल किसी रास्ते से जा रहा था | उसने देखा सामने एक बिजली के खंभे में एक पेपर चिपका है और उसमें कुछ लिखा हुआ है | उसमें लिखा था की कल इस रास्ते से गुजरते वक्त मेरे 50 रुपए कहीं गिर गए | मुझे ठीक से दिखाई नहीं देता तो कृपया इस रास्ते पर कहीं भी किसी को भी अगर मेरे 50 रुपए मिले तो इस पते पर पहुंचा दें |

नीचे लिखे पते को पढ़कर उस शख्स का मन वहां जाने को करने लगा | उस शख्स ने उस पते को याद किया और उसकी तरफ बढ़ने लगा | वहां जाने के बाद जब उस शख्स ने आवाज लगाई
तो देखा गली के आखिरी में एक झोपड़ी है और वहां से एक बूढ़ी औरत लाठी के सहारे बाहर निकल रही है | उस शख्स को मालूम हुआ कि वो वृद्धा वहां अकेली रहती थी |
बूढ़ी औरत के सामने आने पर उस शख्स ने कहा कि माजी आपके जो 50 रुपए गिरे थे | वे मुझे मिले हैं और यह रहे आपके 50 रुपए उसकी बात सुनकर बूढ़ी औरत रोने लगी और कहां बेटा कल से अब तक करीब 20 से 25 लोग मुझे 50 रुपए देकर जा चुके हैं |
मुझे ठीक से दिखाई नहीं देता मुझे पढ़ना लिखना भी नहीं आता ना जाने किसने मेरी हालत देख कर मेरी मदद करने के लिए ऐसा किया है उस शख्स के बहुत कहने पर वे 50 रुपए तो ले लिए लेकिन उससे यह विनती की बेटा जाते वक्त वह संदेश वो कागज जरूर फाड़ देना ना जाने किसने मुझ पर तरस खा के ऐसा किया |
उस शख्स ने सिर हिलाते हुए बूढ़ी औरत की बातें में हामी भर ली थोड़ी दूर जाने के बाद वह शख्स सोचने लगा आखिर मुझसे पहले आए उन 20 से 25 लोगों को भी तो उस बूढ़ी औरत ने वो संदेश फाड़ने के लिए कहां होगा लेकिन किसी ने भी अब तक उसे नहीं फाड़ा तो मैं कैसे फाड़ दू |
उस शख्स के मन में उस व्यक्ति के लिए बहुत ही आदर का भाव आ रहा था जिसने बूढ़ी औरत की सेवा के लिए इस तरीके को ढूंढा उस शख्स का मन उस व्यक्ति के लिए रिस्पेक्ट से भर चुका था फिर क्या उस शख्स ने भी बिजली के खंभे पर लिखे उस संदेश को वैसे ही रहने दिया |

दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमारे मन में केवल कर्म करने की इच्छा होनी चाहिए मदद के अनेकों तरीके हैं अगर हमारे अंदर किसी की मदद करने की इच्छा हो तो हम किसी ना किसी रूप में जरूरतमंद की सेवा कर सकते हैं |
किसी ने क्या खूब कहा है -
कर्म तेरे अच्छे हैं तो किस्मत तेरी दासी है ,
नियत तेरी अच्छी है तो घर में मथुरा काशी है |


यह दुनिया एक शीश महल है

यह दुनिया एक शीश महल है |
यह कहानी आपको बताएगी कि किसी भी इंसान के जिंदगी में आत्मविश्वास का होना कितना ज्यादा महत्वपूर्ण है |
एक समय की बात है एक शिष्य ने अपने गुरु से पूछा गुरुदेव आपकी दृष्टि में संसार क्या है | गुरु  में जवाब दिया ये संसार एक शीश महल है और मैं तुम्हें एक कहानी के माध्यम से  ये  बात समझाता हूं |
एक नगर में एक शीश महल था | महल के हर एक दीवार पर सैकड़ों सीसे जुड़े हुए थे | एक दिन एक गुस्सैल कुत्ता महल में घुस गया महल के भीतर उसे सैकड़ों गुस्सैल कुत्ते दिखाई दिए जो नाराज थे | उस पर भौंक रहे थे उन सैकड़ों कुत्तों को अपने ऊपर भौंक्ता देखकर वह कुत्ता वहां से डर कर भाग गया | कुछ दूर जाकर उसने मन ही मन सोचा इस जगह से बुरी जगह कोई हो ही नहीं सकती |
कुछ ही दिनों बाद एक दूसरा कुत्ता उस शीश महल में पहुंचा वह काफी खुशमिजाज और जिंदादिल था | महल में घुसते ही उसे वहां सैकड़ों कुत्ते दुम हिला कर उसका स्वागत करते हुए दिखे उसका आत्मविश्वास बड़ा उसने सामने खुश होकर देखा तो उसे सैकड़ों कुत्ते खुशी जताते हुए नजर आए उसकी खुशी का ठिकाना ना रहा |
जब वह महल से बाहर आया  तो उसने महल को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ स्थान माना और वहां के अनुभव को अपने जीवन का सबसे बढ़िया अनुभव माना | वह वापस उस महल के अंदर गया थोड़े अंदर जाने पर उसने देख की पशु , पक्षियों और जानवरों के लिए वहां पर अलग से एक उद्यान बना हुआ था | जहां पर उनके खाने पीने के लिए ढेर सारी सामग्री उपलब्ध थी | उस महल को बनाने वाला राजा पशु प्रेमी था | इसलिए उस राजा ने कुछ लोगों को पशुओं की सेवा के लिए वहां पर रखा था | राजा के कर्मचारियों ने उस कुत्ते को खाने के लिए काफी अच्छी-अच्छी चीजें दी | पेट भरकर खाने के बाद वह कुत्ता वहां से चला गया |
यह कहानी समाप्त करने के बाद गुरु ने अपने सिर से कहा –
देखो पुत्र संसार भी एक ऐसा ही शीश महल है जिसमें व्यक्ति अपने विचारों के अनुरूप ही प्रतिक्रिया करता है |  जो लोग संसार को आनंद का बाजार मानते वो यहां से हर प्रकार का सुख और आनंद लेते हैं और जो लोग इसे दुखों का कारागार मानते हैं उनकी झोली में सिर्फ दुख और कटुता के सिवाय कुछ नहीं आता |
दोस्तों ये तो एक कहानी मात्र थी लेकिन ये जिंदगी की किसी हकीकत से कम नहीं है | कभी-कभी हमारी सोच एक मक्खी की तरह होती है वो सारी अच्छी चीजों को छोड़कर गंदगी पर  ही
जाकर बैठती है  और ये सोच हमारे देखने का नजरिया तय करती हैं |
जैसी हमारी सोच वैसे ही हमारे कर्म
और वैसे ही मिलते हैं हमको
आने वाले समय में अपने किए गए कर्मों के फल
जो अच्छे और बुरे दोनों हो सकते हैं | फर्क सिर्फ इतना है कि आप दुनिया को किस नजरिए से देखते हैं क्योंकि –
यह दुनिया एक शीश महल है |


हुनर की कीमत

हुनर की कीमत |
दोस्तों एक बार की बात है एक टीचर अपनी क्लास में पढ़ा रहे थे | बच्चों को कुछ नया सिखाने के लिए टीचर ने जेब से 100 रुपए का नोट निकाला | अब बच्चों को वो नोट दिखा कर कहा क्या आप लोग बता सकते हैं ये कितने रुपए का नोट है | सभी बच्चों ने कहा 100 रुपए का नोट  फिर टीचर ने कहा इस नोट को कौन - कौन लेना चाहेगा | तो सभी बच्चों ने अपना हाथ खड़ा कर दिया |
अब उस टीचर ने उस नोट को मुट्ठी में बंद करके बहुत बुरी तरीके से मसला जिससे उस नोट की स्थिति बहुत खराब हो गई | फिर टीचर ने बच्चों को वो नोट दिखा कर कहा | अब तो यह नोट कुचल गया है अब इसे कौन लेना चाहेगा | फिर भी सभी बच्चों ने अपना हाथ उठा दिया | अब उस टीचर ने उस नोट को जमीन पर फेंक दिया | जमीन पर गिरने से उस नोट में बहुत सारी धूल और मिट्टी लग गई | फिर टीचर ने नोट को उठाकर बच्चों को दिखाया और फिर से वही सवाल पूछा कि अब इसे कौन लेना चाहेगा सभी बच्चों ने अपना हाथ फिर उठा दिया | फिर टीचर ने बच्चों से कहा | इस 100 रुपए के नोट को देखो इसकी कीमत कुचले जाने के बाद ,  गंदे होने के बाद भी कम नहीं हुई |
 ठीक वैसे ही इंसान की कीमत उसके हुनर और उसके काबिलियत की कीमत हमेशा वही रहती है | चाहे आपके ऊपर कितनी भी मुश्किलें आ जाएं कितनी भी विषम परिस्थिति आ जाए | इसलिए जिंदगी में हमेशा खुद को और बेहतर बनाते रहो | क्योंकि परिस्थितियां आपके हुनर को आप से नहीं छीन सकती और यह हुनर ही होता है जो मुश्किल परिस्थितियों में आप की कीमत बनाकर रखता है | उस परिस्थिति से बाहर निकाल कर लाता है |

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